मेरी पहली सेक्सी कहानी & दर्दभरी रोमांचक
दिन का जश्न
अगले दिन सबको यह पता था कि घर की लाड़ली बेटी का जन्मदिन है तो सबने अपने-अपने काम से छुट्टी ले ली थी. सुबह सुबह ही सबने मयूरी की जन्मदिन की बहुत सारी बधाइयाँ दी.
नाश्ते के वक्त अशोक ने यह एलान कर दिया कि आज शाम को जो मयूरी के जन्मदिन का जश्न होगा, उसमें सिर्फ घर के लोग होंगे और बाहर का कोई भी व्यक्ति नहीं होना चाहिए.
इस बात पर सबने अपनी सहमति जताई।
फिर नाश्ते के बाद सब लोग शॉपिंग के लिए निकल गए और मयूरी के लिए बहुत सारे कपड़े-वगैरह ले आये. जन्मदिन वाला केक घर के फ्रिज में रख दिया गया.
करीब 8 बजे सब लोग घर के हॉल में इकठे हुए. रजत फ्रिज से केक ले आया और डाइनिंग टेबल पर रख दिया. घर को बहुत अच्छे से पहले ही सजाया जा चुका था. सब लोग बहुत खुश और उत्साहित लग रहे थे. डाइनिंग टेबल के आस-पास से सारी कुर्सियों को हटा दिया गया था. लम्बे से डाइनिंग टेबल के एक तरफ मयूरी खड़ी थी और उसके बगल में उसके पापा और बाकी सारे लोग टेबल के दूसरी तरफ खड़े थे मयूरी के एकदम सामने.
मयूरी ने एक लाल रंग का टॉप और नील रंग का जींस के कपड़े वाला शॉर्ट्स पहना हुआ था और उसके इस पहनावे में उसका गदराया हुआ शरीर एकदम क़यामत लग रहा था. उसने लाल रंग की गहरी लिपस्टिक लगायी हुई थी, मेक-अप की उसको कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि वो प्राकृतिक रूप से की बला की खूबसूरत थी, और वो इस वक्त एकदम माल लग रही थी.
घर के सब लोग मयूरी के केक काटने का इंतजार कर रहे थे कि मयूरी ने मुस्कुराते हुए अपने पापा की ओर देखकर अपनी आँखों से कुछ इशारा किया.
अशोक समझ गया और मयूरी के ठीक बगल में आ खड़ा हुआ. खड़ा होते ही उसने बोलना शुरू किया- आज हमारी लाड़ली का जन्मदिन है और इस शुभ मौके पर मैं कुछ कहना चाहता हूँ.
रजत- हाँ.. पापा… बिल्कुल.
अशोक- देखो… इस घर में कुल पांच लोग हैं… तीन मर्द और दो औरत.
विक्रम- हाँ…
अशोक- और सब के सब वयस्क हैं… मतलब 18 साल या उस से ऊपर की उम्र के…
विक्रम- जी पापा…
अशोक ने गहरी सांस ली और मयूरी की तरफ देखा जैसे इजाजत मांग रहा हो… मयूरी ने जैसे आँखों से इशारो-इशारों में अपनी सहमति दी.
अशोक अपनी बात जारी रखता है- तो अब जो मैं बात बोलने जा रहा हूँ… उस से इस घर की किस्मत बदलने वाली है… और इसके बाद सब कुछ हमेशा के लिए बदल जायेगा… जिसे चाहकर भी कभी वापिस नहीं लाया जा सकेगा.
विक्रम उत्सुकता से- ऐसी क्या बात है पापा?
अशोक- बता रहा हूँ… सुनो.
और अशोक धीरे से मयूरी के पीछे जा खड़ा हुआ और अपने दोनों हाथ उसने उसकी कमर पर रख दिए और llधीरे-धीरे अपने हाथों को वो ऊपर ले जाने लगा मयूरी की चूचियों की तरफ. पर उसने ऐसा झटके में नहीं किया वक्त लिया… और उसने बातचीत जारी रखी- मेरी बेटी… जितनी खूबसूरत है… उतनी ही हसीन भी है और उसका शरीर कमाल का है… इतना कमाल का है कि अगर किसी की नजर इसकी इन भारी-भारी चूचियों पर एक बार पड़ जाए तो वो अपनी नजर हटा नहीं सकता.
ऐसा कहते हुए अशोक ने अपने दोनों हाथों से मयूरी की दोनों चूचियों को जोर से जकड़ लिया और दबाने लगा.
मयूरी के मुँह से सुख वाली आहें निकल गयी- आ… ह… आह… पापा.
और अशोक ने घर में सब के सामने उसकी चूचियों को दबाना चालू रखा. घर के बाकी सारे लोगों की हालत गंभीर हो रही थी और वो इस स्थिति को समझ नहीं पा रहे थे. हो तो सबकुछ वैसे ही रहा था जैसे वो कई दिनों से चाहते थे पर अचानक से होने से सब के सब अवाक् रहे गए.
शीतल को तो वैसे भी पता था कि अशोक मयूरी को चोद रहा है पर सब के सामने ऐसे व्यव्हार से वो भी विचलित हो रही थी.
विक्रम- प… प्… पापा…
अशोक- विक्रम, तुम्हारे लिए तो यह नया नहीं है ना? तुमने ही तो सबसे पहले मयूरी की चूचियों के दर्शन किये थे. क्यूँ?
विक्रम- पा… पा… वो… आपको पता है?
शीतल- क्या?
शीतल इस बात से अनजान थी और उसके लिए ये बात एकदम नयी थी.
अशोक ने शीतल को जवाब दिया- हाँ मेरी जान… तुम्हारे बड़े बेटे ने सब से पहले मेरी इस फूल जैसी लड़की की कच्छी उतारी… उसकी चूचियों को चूसा, दबाया… उसकी चूत भी चाटी… वो भी इसी घर में…
शीतल- क्या?
अशोक- हाँ… और तो और… उसने अपना लंड भी चुसवाया अपनी छोटी बहन से…
शीतल- म… मतलब…?
अशोक- अरे इतना ही नहीं… अगले ही दिन… तुम्हरे इस बड़े बेटे ने मयूरी की चूत की सील भी तोड़ी और खूब चोदा… वो भी तुम्हारे छोटे बेटे के साथ… मिलकर… जैसे वो दोनों तुम्हें चोदते हैं.
शीतल जैसे पकड़ी गयी हो… वो घबरा गयी यह जानकर कि उसके पति को पता चल चुका है कि वो अपने दोनों बेटों से चुदवा रही है- म… मै.. मैं… वो…
अशोक- रुको… नहीं… तुम्हारे जैसे नहीं चोदते हैं ये दोनों इसको… क्यो
दिन का जश्न
अगले दिन सबको यह पता था कि घर की लाड़ली बेटी का जन्मदिन है तो सबने अपने-अपने काम से छुट्टी ले ली थी. सुबह सुबह ही सबने मयूरी की जन्मदिन की बहुत सारी बधाइयाँ दी.
नाश्ते के वक्त अशोक ने यह एलान कर दिया कि आज शाम को जो मयूरी के जन्मदिन का जश्न होगा, उसमें सिर्फ घर के लोग होंगे और बाहर का कोई भी व्यक्ति नहीं होना चाहिए.
इस बात पर सबने अपनी सहमति जताई।
फिर नाश्ते के बाद सब लोग शॉपिंग के लिए निकल गए और मयूरी के लिए बहुत सारे कपड़े-वगैरह ले आये. जन्मदिन वाला केक घर के फ्रिज में रख दिया गया.
करीब 8 बजे सब लोग घर के हॉल में इकठे हुए. रजत फ्रिज से केक ले आया और डाइनिंग टेबल पर रख दिया. घर को बहुत अच्छे से पहले ही सजाया जा चुका था. सब लोग बहुत खुश और उत्साहित लग रहे थे. डाइनिंग टेबल के आस-पास से सारी कुर्सियों को हटा दिया गया था. लम्बे से डाइनिंग टेबल के एक तरफ मयूरी खड़ी थी और उसके बगल में उसके पापा और बाकी सारे लोग टेबल के दूसरी तरफ खड़े थे मयूरी के एकदम सामने.
मयूरी ने एक लाल रंग का टॉप और नील रंग का जींस के कपड़े वाला शॉर्ट्स पहना हुआ था और उसके इस पहनावे में उसका गदराया हुआ शरीर एकदम क़यामत लग रहा था. उसने लाल रंग की गहरी लिपस्टिक लगायी हुई थी, मेक-अप की उसको कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि वो प्राकृतिक रूप से की बला की खूबसूरत थी, और वो इस वक्त एकदम माल लग रही थी.
घर के सब लोग मयूरी के केक काटने का इंतजार कर रहे थे कि मयूरी ने मुस्कुराते हुए अपने पापा की ओर देखकर अपनी आँखों से कुछ इशारा किया.
अशोक समझ गया और मयूरी के ठीक बगल में आ खड़ा हुआ. खड़ा होते ही उसने बोलना शुरू किया- आज हमारी लाड़ली का जन्मदिन है और इस शुभ मौके पर मैं कुछ कहना चाहता हूँ.
रजत- हाँ.. पापा… बिल्कुल.
अशोक- देखो… इस घर में कुल पांच लोग हैं… तीन मर्द और दो औरत.
विक्रम- हाँ…
अशोक- और सब के सब वयस्क हैं… मतलब 18 साल या उस से ऊपर की उम्र के…
विक्रम- जी पापा…
अशोक ने गहरी सांस ली और मयूरी की तरफ देखा जैसे इजाजत मांग रहा हो… मयूरी ने जैसे आँखों से इशारो-इशारों में अपनी सहमति दी.
अशोक अपनी बात जारी रखता है- तो अब जो मैं बात बोलने जा रहा हूँ… उस से इस घर की किस्मत बदलने वाली है… और इसके बाद सब कुछ हमेशा के लिए बदल जायेगा… जिसे चाहकर भी कभी वापिस नहीं लाया जा सकेगा.
विक्रम उत्सुकता से- ऐसी क्या बात है पापा?
अशोक- बता रहा हूँ… सुनो.
और अशोक धीरे से मयूरी के पीछे जा खड़ा हुआ और अपने दोनों हाथ उसने उसकी कमर पर रख दिए और llधीरे-धीरे अपने हाथों को वो ऊपर ले जाने लगा मयूरी की चूचियों की तरफ. पर उसने ऐसा झटके में नहीं किया वक्त लिया… और उसने बातचीत जारी रखी- मेरी बेटी… जितनी खूबसूरत है… उतनी ही हसीन भी है और उसका शरीर कमाल का है… इतना कमाल का है कि अगर किसी की नजर इसकी इन भारी-भारी चूचियों पर एक बार पड़ जाए तो वो अपनी नजर हटा नहीं सकता.
ऐसा कहते हुए अशोक ने अपने दोनों हाथों से मयूरी की दोनों चूचियों को जोर से जकड़ लिया और दबाने लगा.
मयूरी के मुँह से सुख वाली आहें निकल गयी- आ… ह… आह… पापा.
और अशोक ने घर में सब के सामने उसकी चूचियों को दबाना चालू रखा. घर के बाकी सारे लोगों की हालत गंभीर हो रही थी और वो इस स्थिति को समझ नहीं पा रहे थे. हो तो सबकुछ वैसे ही रहा था जैसे वो कई दिनों से चाहते थे पर अचानक से होने से सब के सब अवाक् रहे गए.
शीतल को तो वैसे भी पता था कि अशोक मयूरी को चोद रहा है पर सब के सामने ऐसे व्यव्हार से वो भी विचलित हो रही थी.
विक्रम- प… प्… पापा…
अशोक- विक्रम, तुम्हारे लिए तो यह नया नहीं है ना? तुमने ही तो सबसे पहले मयूरी की चूचियों के दर्शन किये थे. क्यूँ?
विक्रम- पा… पा… वो… आपको पता है?
शीतल- क्या?
शीतल इस बात से अनजान थी और उसके लिए ये बात एकदम नयी थी.
अशोक ने शीतल को जवाब दिया- हाँ मेरी जान… तुम्हारे बड़े बेटे ने सब से पहले मेरी इस फूल जैसी लड़की की कच्छी उतारी… उसकी चूचियों को चूसा, दबाया… उसकी चूत भी चाटी… वो भी इसी घर में…
शीतल- क्या?
अशोक- हाँ… और तो और… उसने अपना लंड भी चुसवाया अपनी छोटी बहन से…
शीतल- म… मतलब…?
अशोक- अरे इतना ही नहीं… अगले ही दिन… तुम्हरे इस बड़े बेटे ने मयूरी की चूत की सील भी तोड़ी और खूब चोदा… वो भी तुम्हारे छोटे बेटे के साथ… मिलकर… जैसे वो दोनों तुम्हें चोदते हैं.
शीतल जैसे पकड़ी गयी हो… वो घबरा गयी यह जानकर कि उसके पति को पता चल चुका है कि वो अपने दोनों बेटों से चुदवा रही है- म… मै.. मैं… वो…
अशोक- रुको… नहीं… तुम्हारे जैसे नहीं चोदते हैं ये दोनों इसको… क्यो

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